तुम्हारे दर पे आया हु

पारंपरिक
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॥ पावन पाठ ॥

तुम्हारे दर पे आया हु,मैं झोली भर ले जाउगा,

जो तुमने सुनी न मेरी तो साई रो रो मर जाऊँगा,

तुम्हारे दर पे आया हु...

कोई दर्द सुने न मेरा सब है सुख के साथी,

रो कर सुनती है दुनिया फिर हस के सुनाती,

तुम से कुछ मिल जाए तो मैं भाग जगाउंगा,

जो तुमने सुनी न मेरी तो साई रो रो मर जाऊँगा,

तुम्हारे दर पे आया हु...

क्या तुम को सुनाऊ साई तुम तो जानो दिल की,

तुम तो राहे जानो मेरी मंजिल की,

नजर तुम्हारी हो तो ख़ुशी के दीप जलाऊ गा,

जो तुमने सुनी न मेरी तो साई रो रो मर जाऊँगा,

तुम्हारे दर पे आया हु...

रेहमत है बरसती साई आंगन में तुम्हारे,

खुशियों में दुखो में साई सब तुम को पुकारे,

हर लम्हा साई के सब को गीत सुनाऊ गा,

जो तुमने सुनी न मेरी तो साई रो रो मर जाऊँगा,

तुम्हारे दर पे आया हु...

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।