हरी मैं तेरी दास हो गई

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

हो हो हो हरी मैं तेरी दास हो गई,

दास हो गई मैं तेरे पास हो गई,

हो हो हो हरी मैं तेरी दास हो गई,

तू है ठाकुर तो मैं हु पुजारी,

तू है दाता तो मैं हु भिखारी,

मेरी झोली तो भर मुझको किस का है डर,

हो हो हो हरी मैं तेरी दास हो गई,

तू है चंदा तो मैं हु चकोरी,

तू है फूल तो मैं खुशबू तेरी,

मुखड़ा देखु तेरा चंचल मन हो मेरा,

हो हो हो हरी मैं तेरी दास हो गई,

तू है सागर तो मैं लेहर तेरी,

कैसे डूबे गी अब नैया मेरी,

श्याम जल्दी से आ आके पार लगा,

हो हो हो हरी मैं तेरी दास हो गई,

तू है सूरज तो मैं किरण तेरी,

अब प्रीत निभेगी तेरी मेरी,

तू मुझमे समा मैं तुझमे समा,

हो हो हो हरी मैं तेरी दास हो गई,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।