जो कुछ भी होगा

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॥ पावन पाठ ॥

बड़े प्रेम से माँ को रिजाता जो होगा,

जो कुछ भी होगा अच्छा ही होगा,

बड़े प्रेम से माँ को रिजाता जो होगा,

कांटे मिले तो शिकायत न करना,

उसकी किरपा के इशारा समझना,

दादी का तुझको इशारा मिलेगा,

जो कुछ भी होगा अच्छा ही होगा,

विधि का विधान कोई बदलने न पाए,

दादी की होके क्यों तू गबराये,

उजाड़ा घरोना पे तेरा वसेरा,

जो कुछ भी होगा अच्छा ही होगा,

सहारा तुझे फिर माँ से मिलेगा,

माँ के सिवा तेरी कोई न सुने गा,

अंधेरो में तेरे दीपक जले गा,

जो कुछ भी होगा अच्छा ही होगा,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।