नाचत कुदत चलि आई माँ काली

पारंपरिक
महादेव भजन दुर्गा भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

नाचत कुदत चलि आई माँ काली,

खेलत कुदत चली आई माँ काली,

कलकत्ता की महा मई काली,

लट भिखराई आई माँ काली,

लचत घुमाती चली आई भवानी,

खेलत कुदत चली आई माँ काली,

शुंभ निशुंभ विधारनी माता हे जगजननी हे जग दाता,

भगतो की रक्शा करो महाकाली,

नाचत कुदत चलि आई माँ काली,

मनमंदिर में तेरी मूरत निशदिन देखु तेरी सूरत,

किरपा करो महाकाली भवानी,

नाचत कुदत चलि आई माँ काली,

नीरज गाये महिमा तेरी अर्जी सुन न माता मेरी ,

निश दिन करू जय जय कार भवानी ,

नाचत कुदत चलि आई माँ काली,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।