मेरा सोया नसीब जगा सैयां

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॥ पावन पाठ ॥

मेरा सोया नसीब जगा सैयां मुझे दर पे अपने भुला सैयां,

मेरी लाज आज रखना महाराज आज रखना,

मेरी विनती सुन ले साई,

मेरा सोया नसीब जगा सैयां मुझे दर पे अपने भुला सैयां,

तेरी शान है निराली,तू शिरडी का वाली कभी जाऊगा न खाली,

तेरी थाम के मैं झोली तेरे दर पे साई मैं आउ होठो पे प्यास लाउ,

मेरी विनती सुन ले साई ,

मेरा सोया नसीब जगा सैयां मुझे दर पे अपने भुला सैयां,

मैंने दुःख बड़े है झेले,

मुझे तू शरण में लेले मैं जीता हु अकेले,

मुझे भाते नहीं मेले मुझे शिरडी तू भुला ले मुझे साई तू निभा ले,

मेरी विनती सुन ले साई

मेरा सोया नसीब जगा सैयां मुझे दर पे अपने भुला सैयां,

दे अमीन को सहारा साई मैं बेसहारा साई कर दे इक इशारा.

तेरा देखु मैं नजारा तेरा दर बड़ा है प्यारा करुगा वही गुजारा,

मेरी विनती सुन ले साई,

मेरा सोया नसीब जगा सैयां मुझे दर पे अपने भुला सैयां,

एम्स निज़ायमी ब्रदर फिरते थे पहले दर दर,

तेरा हुआ इशारा किस्मत का चमका तारा ,

ऐसी निगाह डाली भर डाली झोली खाली,

तूने खाख से उठाया मुझे आसमा बनाया इतना कर्म है साई,

मेरा सोया नसीब जगा सैयां मुझे दर पे अपने भुला सैयां,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।