मुझे साई नाम का सरूर है

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॥ पावन पाठ ॥

मुझे साई नाम का सरूर है ,

मेरा साई सच्चा हजूर है,

मेरे साई ने ऐसा कर्म कियाँ मैंने जो मंगा मुझे वो ही दियां,

मुझे जा में रेहमत पीला साई ने मस्तकंदर बना दियां,

मेरा सजदा ये जो काबुल हुआ मैं साई चरणों की धूल हुआ,

मैं क्या था क्या हु याद नहीं मैं खुद ही को कब का भूल गया,

मुझे ऐसा जलवा दिखा दियां मुझे नाम प्याला पीला साई ने,

मुझे मस्त कलंदर बना दियां,

मुझे साई वो सौगात मिली,

मेरी बिगड़ी हुई हर बात बनी,

उजला महका हर दिन है मेरा दिवाली सी है हर रात मेरी,

मेरे बाबा ने ऐसा कर्म किया मेरा चर्चा घर घर करा साई ने,

मुझे मस्त कलंदर बना दियां,

मुझे श्रद्धा सबुरी ज्ञान दियां,

अपने बचे का मान किया,

जब शरण साई की मिल गई तो,

क्या सच्चा सुख है जान लिया,

मेरी खुशियों से भर दी झोली मुझे अपनी शरण में लगा साई ने,

मुझे मस्त कलंदर बना दियां,

मेरे साई है ऊंची शान मेरी,

तू बाबा बना अब जान मेरी,

मैं कुछ भी ही अब तू ही तू,

है तुमसे ही पहचान मेरी,

तेरे नाम की मस्ती में साई ,

बतरा ने जमाना भुला दिया,

मुझे मस्त कलंदर बना दियां,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।