मैं तेरे बिन रह नहीं सकदा माँ मैनू तेरी आदत पै गयी ए

नरेन्द्र चंचल
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

मैं तेरे बिन रह नहीं सकदा माँ,

मैनू तेरी आदत पे गयी ए ।

मैं जूदइयाँ सह नहीं सकदा माँ ,

मैनू तेरी आदत पह गयी ए ॥

तूं सारे जग दी माँ है, मैनू मेरी माँ ने दस्या सी ।

बचैया लई ठंडी छां है, मैनू मेरी माँ ने दस्या सी ।

मैं मूहो कुछ कह नहीं सकदा माँ , मैनू........॥

मैनू हरपल महारानी तेरी ही याद सतउंदी ऐ

न दिन च चैन मिलदा ऐ न राति नींद ही औंदी ऐ

मैं साह वी ले नहीं सकदा माँ, मैनू........॥

मैं तेरे रंग विच मैए अपना तन मन रंगेया ऐ

मैं होर कुछ न मंगया तेरा दीदार ही मंगया ऐ

मैं खाली बह नहीं सकदा माँ ,मैनू ........॥

मेरे रोम रोम विच दाती तेरे ही नाम दी माला ऐ

मेरे चंचल मन विच मैया तेरा ही रूप निराला ऐ

ऐ घर हुन्न ढह नहीं सकदा माँ, मेनू तेरी जरूरत पे गयी ए

मैं तेरे बिन रह नहीं...

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।