ओ मेरी जगदम्बे महाकाली

पारंपरिक
महादेव भजन दुर्गा भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

ओ मेरी जगदम्बे महाकाली...

करती शेरां दी सवारी...

अम्बे मात रे... हो अम्बे मात रे...

सर पे लाल चुनरिया सोहे...

ये तो भक्तों का मन मोहे...

अम्बे मात रे... हो अम्बे मात रे...

जगजननी दुर्गा भवानी...

अम्बा महारानी जी, अम्बा महारानी...

बेटों का कभी न छोड़े हाथ रे...

हो अम्बे मात रे...

बिगड़ी बनाए मैया...

दुखड़े मिटाए जी, दुखड़े मिटाए...

संकट में सदा निभाए साथ रे...

हो अम्बे मात रे...

अष्टभुजी मां शेरांवाली...

भरती सबकी झोली खाली...

जो भी दर पे आए मां, जो भी दर पे आए...

मेरी मैया... जय हो...

सर पे तेरे ओ मैया, लाली चुनरिया सोहे...

कानों में कुंडल साजे जी, कानों में कुंडल साजे...

लागे तेरा रुप सलोना मात रे...

हो अम्बे मात रे...

ओ मेरी जगदम्बे महाकाली,

करती शेरों दी सवारी,

अम्बे मात रे... हो अम्बे मात रे...

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।