भादी अमावस आयी

पारंपरिक
माता दुर्गा आरती रानी सती दादी भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

भादी अमावस आयी, भगतां मिल ज्योत जगायी,

बेगा पधारो म्हारे आंगणे...

ओ दादी... बेगा पधारो म्हारे आंगणे...

थारी चौकी सजवायी, लाली चुनर मंगवायी,

बेगा पधारो म्हारे आंगणे...

ओ दादी... बेगा पधारो म्हारे आंगणे...

सिंह चढ़कर आजो भवानी, सब मिल पुकारां हो, सब मिल पुकारां...

बैठो सिंहासन दादी, आरती उतारां हो, आरती उतारां...

मंगल सुनावां गाकर, दर्शन थे दीजो आकर,

भल भल पधारो म्हारे आंगणे...

ओ दादी... भल भल पधारो म्हारे आंगणे...

फूलां रो हार मंगाया, मोतियन की माला हो, मोतियन की माला...

थारे आणे से दादी, घर घर उजाला हो, घर घर उजाला...

सगली सतियन ने लाजो, राणा ने टेर लगाजो...

तनधन बाबा संग आजो आंगणे...

ओ दादी... तनधन बाबा संग आजो आंगणे...

म्हारी दादी के पावां, बिछिया पैजनिया हो, बिछिया पैजनिया...

पायल छनकावे दादी, लागे दुल्हनिया हो, लागे दुल्हनिया...

थारो मुलकातो मुखड़ो, चंदा सूं लागे उजलो,

छम छम पधारो म्हारे आंगणे...

ओ दादी... छम छम पधारो म्हारे आंगणे...

अपने हाथां से थाने, चुनर ओढ़ावां हो, चुनर ओढ़ावां...

सोलह श्रृंगार से दादी, थाने सजावां हो, थाने सजावां...

कुमकुम लगावां थाने, मेंहदी लगावां थाने,

अत्तर बरसे छे म्हारे आंगणे...

ओ दादी... अत्तर बरसे छे म्हारे आंगणे...

थारी चौखट पे दादी, अरजी लगावां हो, अरजी लगावां...

पलकां बिछाये बैठां, थाने बुलावां हो, थाने बुलावां...

मनसा थे पूरी कर दो, भगतां री झोली भर दो,

म्हाने भी बुलाजो थारे आंगणे...

ओ दादी, म्हाने भी बुलाजो थारे आंगणे...

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।