शिव अदभुत रूप बनाए

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

शिव अदभुत रूप बनाए, जब ब्याह रचाने आए

भुत बेताल थे, सब्ग में चंडाल थे,

कैसी बारात सिव सजाए, जब ब्याह रचाने आए

शिव अदभुत.........

लंगड़े-लूले थे, अंधे-काणे भी थे,

शुक्र-शनिचर को भी संग लाये, जब ब्याह रचाने आए

शिव अदभुत........

आए सब देवता, पाए जब देवता,

देवियों को भी संग में लाए, जब ब्याह रचाने आए

शिव अदभुत........

लोग डरने लगे और यह कहने लगे,

रूप कैसा गजब बानाए, जब ब्याह रचाने आए

शिव अदभुत..........

बोलो सत्यम, शिवम् है वही सुन्दरम,

गोरा के मन को भाए शिव अदभुत रूप बानाए

शिव अदभुत..........

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।