आये माँ जगदम्बे जी

पारंपरिक
महादेव भजन दुर्गा भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

आये माँ जगदम्बे जी नवरात्रि में आये,

झूमो नाचो ओ नाचो ओ नाचो रे ,

झूमो नाचो जाओ भगतो दे दे के ताली,

आयी माई जगदम्बे माँ शेरोवाली,

आये माँ जगदम्बे जी,,,,,,

पंखिड़ा ओ पंखिड़ा पंखिड़ा ओ पंखिड़ा,

पंखिड़ा तू उड़ के जाना पांवा गढ़ रे,

महाकाली से मिल के कहना गरबा खेलेंगे,

जहाँ जहाँ अम्बे ने डालें है डेरे ,

वहाँ वहाँ भगतो ने रंग है बिखेरे,

गली गली ओ गली ओ गली रे ,

गली गली छायी रही रँगों की होली,

आयी माई जगदम्बे माँ शेरोवाली,

आये माँ जगदम्बे जी ,,,,,,,ll

ईधना विनवा गईथी मोरी सैंया ,

ईधना विनवा गईथी रे ,

पूछ रही थी गलिया गलिया,

कहा तेरा जिया कहा तेरा पिया रे,

ईधना विनवा गईथी मोरी सैंया

ईधना विनवा गईथी रे ,

ऊँचे ऊँचे पर्वतो से माँ चल के आयी,

जोता वाली माँ अम्बे जोत में समायी,

हरे हरे ओ हरे ओ हरे रे,

हरे हरे मंडपो छायी खुशिहाली

आयी माई जगदम्बे माँ शेरोवाली,

आये माँ जगदम्बे जी,

का खाथे तुलशी का खाथे राम

का खाथे हो छोटे सालिक राम,

लड्डु खाथे तुलशी पेड़ा खाथे राम,

दही खाथे हो छोटे सालिक राम,

लाल लाल चुनरी माँ भगतो ने चढाई,

गरबे में नाच रही अम्बे महामाई,

झूम रही ओ रही ओ रही रे ,

झूम रही सारा जग छायी ख़ुशियाली,

आयी माई जगदम्बे माँ शेरोंवाली,

आये माँ जगदम्बे जी ,,,,,,

झूमो नाचो गाओ भगतो दे दे के ताली,

आयी माई जगदम्बे माँ शेरोवाली ,

आये माँ जगदम्बे जी नवरात्रि में आये,

singer ,,,,, DEVENDRA SHARMA .

KUMKUM MISHRA

VARSHA MISHRA

MO.7697615162

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।