परचम लहराया रन में रघुवर की शान का

पारंपरिक
हनुमान जी भजन हनुमान भजन hanuman
॥ पावन पाठ ॥

परचम लहराया रन में रघुवर की शान का,

लंका में डंका भाजे प्यारे हनुमान का,

परचम लहराया रन में रघुवर की शान का,

इक से इक बढ़ के राम की सेना में वीर थे,

मुगदर मुगदर टकराये तीरो से तीर थे,

बल अतुल है बजरंगी में दोनों जहां का,

लंका में डंका भाजे प्यारे हनुमान का,

परचम लहराया रन में रघुवर की शान का,

श्री राम के सेवक की लीला महान है,

इनके हाथो में सेना की सारी कमान है,

तुलसी ने रचा चालीसा जन के कल्याण का,

लंका में डंका भाजे प्यारे हनुमान का,

परचम लहराया रन में रघुवर की शान का,

रवि शाशी से बढ़ के तेज है हनुमत के नूर का,

टिका निमाने लगता है जिनको सिंदूर का,

सिया मात दियां हनुमत को अमृत वरदान का,

लंका में डंका भाजे प्यारे हनुमान का,

परचम लहराया रन में रघुवर की शान का,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।