साइयाँ वे तेरी याद आउंदी ऐ

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॥ पावन पाठ ॥

जदो कोई जात पुछदा ऐ मेरी औकात पुछदा ऐ,

एह आँख अथुरु बरसौंदी ऐ साइयाँ वे तेरी याद आउंदी ऐ,

तेरी दितियाँ नहसीता भुलाइयाँ जग ने,

छडे चंगे कम राखियां बुराइयां जग ने,

मेरे मालका वे हदा ही मुकाइयाँ जग ने,

तोड़ किसे नाल किसे न निभाइयाँ जग ने

किसे दे जदो माप पे रोंदे ने,

पूत जदो आपा खोंदे ने रूह मेरी कंब कंब जांदी है

साइयाँ वे तेरी याद आउंदी है,

तेरे मंदिरा दे बंदे ठेकेदार बन गे

कई मार मार डाके साहूकार बन गये,

फूल किसे लई कंडेया दे हार बन गये,

आज धर्म कर्म भी व्यापार बन गये,

जदो एह जंगा हुन्दियां ने एह टूटियां वंगा रोन्दियाँ ने,

सास मेरी रुक रुक जांदी है साइयाँ वे तेरी याद आउंदी है,

साडा तेरे बाजो कोई न सहारा दातेया,

तनु आना पैना जग ते दोबरा दातेया,

टूट जावे न आसा दा इक तारा दातेया,

सादा वैरी होइ जावे जग सारा दातेया,

जदो कोई कोड़ी गल कर दा जहर कोई अमृत विच भर दा,

आत्मा भी कुरलाउंदी है साइयाँ वे तेरी याद आउंदी है,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।