अंजनी का लाला हु पूरी लंका जला डाला हु

पारंपरिक
हनुमान जी भजन हनुमान भजन hanuman
॥ पावन पाठ ॥

ऐसे न देखो मेरे स्वामी को आंखे निकाल लूंगा,

रावण तेरी बगियाँ को मैं ही उजाड़ दूंगा,

अब शामत है तेरी खूब पड़े गी मार मेरी प्रभु राम का रखवाला हु,

अंजनी का लाला पूरी लंका जला डाला हु,

बड़े बड़े असुरो को हमने पटक पटक मारा है,

भुत पिशात सब डर के भागे रक्षको को मसल डाला है,

राम का हु मैं दास रहता उनके ही साथ मैं ही तो बजरंग बाला हु,

अंजनी का लाला पूरी लंका जला डाला हु,

शंकर का हु अवतारी प्रभु राम है मेरे स्वामी,

सीता माँ को छुपा लिया तो रावण क्रूर अभिमानी,

मेरी बात मान लो मेरी शक्ति जान लो,

अब सभी का तलबार भाला हु,

अंजनी का लाला हु पूरी लंका जला डाला हु,

संजीवनी भुटटी ला के हमने लक्ष्मण की जान बचाया हु,

सेवक हु प्रभु राम का इसी लिए वचन निभाया हु,

सुधार जाओ रावण करता तुम को नमन मैं ही राम नाम का प्याला हु,

अंजनी का लाला हु पूरी लंका जला डाला हु,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।