फेर मानुष नहियो आवणा

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॥ पावन पाठ ॥

सइयो रल कत लिओनी, फेर मानुष नहियो आवणा,

बहनों मिल कत लिओनी,फेर त्रिंजन कद लाणा,

सइयो रल कत लिओनी, फेर मानुष नहियो आवणा ||

चरखा ता मेरा खूब बनाया, कतने नु चित कदी वी ना लाया,

हुन दिल हर हर नाम दा गेड़ा,

सइयो रल कत लिओनी, फेर मानुष नहियो आवणा,

बहनों मिल कत लिओनी,फेर त्रिंजन कद लाणा ||

हुन जिंदड़ी परदेसन होई, रखदा नहीं कड़ी पल सानु कोई,

जाके जंगल डेरा लाणा,

सइयो रल कत लिओनी, फेर मानुष नहियो आवणा,

बहनों मिल कत लिओनी,फेर त्रिंजन कद लाणा ||

डोली ता पिली मेरी सखिया पाइयां,

मिलना ना दिंदे सानु चाँचियां ताइयां,

मुड़के वतन नहियो आवना,

सइयो रल कत लिओनी, फेर मानुष नहियो आवणा,

बहनों मिल कत लिओनी,फेर त्रिंजन कद लाणा ||

साईं अपने नु हर वेले धेआवा,

अलफ अल्लाह दा मैं पलंग बिछावा,

लाय अलाह दा बिछाना,

सइयो रल कत लिओनी, फेर मानुष नहियो आवणा,

बहनों मिल कत लिओनी,फेर त्रिंजन कद लाणा ||

‘बुल्ले शाह’ गुरु दी मजलस बहके,

हर हर नाम धेयाना,

सइयो रल कत लिओनी, फेर मानुष नहियो आवणा,

बहनों मिल कत लिओनी,फेर त्रिंजन कद लाणा ||

सइयो रल कत लिओनी, फेर मानुष नहियो आवणा,

बहनों मिल कत लिओनी,फेर त्रिंजन कद लाणा,

सइयो रल कत लिओनी, फेर मानुष नहियो आवणा ||

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।