खेल तुम्हारे सब से निराले हे शिरडी वाले हे

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॥ पावन पाठ ॥

खेल तुम्हारे सब से निराले हे शिरडी वाले हे शिरडी वाले,

खोले सब की किस्मत के ताले हे शिरडी वाले,

सदा निभाते सब ते रिश्ता तुम जैसा न कोई फरिश्ता,

तुमने सदा सब के कष्ट टाले हे शिरडी वाले,

डगमग डोले जीवन नाइयाँ दिखे न कोई नाथ खिवईया,

नैया मेरी अब तेरे हवाले हे शिरडी वाले,

देख लिया सब को आजमा के कुछ न मिला झोली फैला के,

कौन है जो मेरी बिगड़ी संभाले हे शिरडी वाले,

जे दर छोड़ कहा मैं जाऊ किसको अपनी पीड़ सुनाऊ,

पड़ गए अब तो पैरो में छाले हे शिरडी वाले,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।