हस के गुजारी जा ताने सहारी जा

पारंपरिक
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॥ पावन पाठ ॥

हस के गुजारी जा ताने सहारी जा,

गुरा जी दा नाम लेके, जिंदगी गुजारी जा |

भरेया मेला चार दीना दा,आखिर खाली होना है,

सुख में फिर क्यूँ हँसता मूरख,,दुःख में फिर क्यूँ रोना है,

हस के गुजारी जा ताने सहारी जा,

गुरा जी दा नाम लेके जिंदगी गुजारी जा |

सुख में तेरा हर कोई साथी,दुःख में तेरा कोई भी ना,

इसी लिए फिर मूरख बन्दे, सतगुरा नु भूली ना,

हस के गुजारी जा ताने सहारी जा,

गुरा जी दा नाम लेके जिंदगी गुजारी जा |

जब तक तन में प्राण है बन्दे, काम से फुर्सत पाये ना,

पाप करम तू करता जाए, हरी को बिलकुल ध्याये ना,

हस के गुजारी जा ताने सहारी जा,

गुरा जी दा नाम लेके जिंदगी गुजारी जा |

बीत गया सो पछतायेगा, वेला मुड़ ना आवना है,

औखे वेले कम आवेगा, नाम प्रभु का ध्याना है,

हस के गुजारी जा ताने सहारी जा,

गुरा जी दा नाम लेके जिंदगी गुजारी जा |

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।