रंग बरसु तेरी रेहमत दा आज जागे वाले वेहड़े

पारंपरिक
श्री गणेश भजन दुर्गा भजन ganesh
॥ पावन पाठ ॥

भवन सजाया दातिए तेरा रीजा ला के,

आध गणेश मनाया तेरी ज्योत जगा के,

पेंदा लिश्कारा तेरी ज्योति दा होया चानन चार चुफेरे,

रंग बरसु तेरी रेहमत दा आज जागे वाले वेहड़े ,

माँ खुशिया दी घडी आई तक दे रहा आज तेरियां,

माँ करा गे दीदार जद जागे विच पावे गी माँ फेरियां,

रख बचैया दा तू मान दातिए कर दे दूर हनेरे,

रंग बरसु तेरी रेहमत दा आज जागे वाले वेहड़े ,

चरना च बह के माये सारी रात गुण तेरे गावा गे,

भगति दे रंग विच रंग के जय कारे तेरे लावा गे,

आस पुगादे बचैया दी सुन ले सब दी होके नेड़े,

रंग बरसु तेरी रेहमत दा आज जागे वाले वेहड़े ,

धन्यवाद तेरा माँ घर सादे रोनका तू लाइयाँ ने,

मुहो मंगे वर पाके तेरे दरों झोलियाँ भराइयाँ ने,

सोनी लग जा चरण नाल मैया वंड दी खुशिया खेड़े,

रंग बरसु तेरी रेहमत दा आज जागे वाले वेहड़े ,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।