जब सुबह सवेरे चहके चिड़ियाँ

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

जब सुबह सवेरे चहके चिड़ियाँ माता के दरबार में,

जरा जरा गूंज रहा माँ तेरे ही जैकार से,

जय माँ जय माँ,

नदियों की धारा में माँ झरनो की कल कल में माँ,

पर्वत और गुफाओ में सागर की हलचल में माँ,

फूलो और कलियों में माँ बहती मस्त हवा में माँ,

गुलशन और नजारो में महकी महकी फिजा में माँ,

नाम देता माँ का बवरो की गुंजार में,

जरा जरा गूंज रहा माँ तेरे ही जैकार से,

ग्यानी ध्यानी जपते माँ घर आंगन चौबारे माँ,

कण कण माँ की महिमा है बेटे सभी पुकारे माँ,

साधु की माला में माँ संतो की वाणी में माँ,

सब के होठो पर है माँ ऐसी है कल्याणी माँ,

मैया जी का नाम समाया सांसो के हर ताल में,

धरती अम्बर गूंज रहा माँ तेरे ही जैकार से,

जब सुबह सवेरे ...

जिस से है दुनिया रोशन वो जन जनि माँ कहलाये,

बड़भागी है वो नर तन जो माँ की ममता पाए,

जो भी आता माँ की शरण में आ कर कहता जय हो माँ,

माँ नाम बड़ा पावन है यहाँ भी देखो वह है माँ,

माँ की पूजा युगो युगो से होती है संसार में,

जरा जरा गूंज रहा माँ तेरे ही जैकार से,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।