दे दर्शन गुरु मेरे रुहां पुकार दियां

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॥ पावन पाठ ॥

दे दर्शन गुरु मेरे रुहां पुकार दियां

दे दर्शन गुरु मेरे.संगता पुकार दिया |

संगता दर्शन करने नु आइया,

प्रेम तेरे ने मस्त बनाइया,

दिल विच लगिया आशा, तेरे दीदार दियां,

दे दर्शन गुरु मेरे रुहां पुकार दियां |

धन धन सतगुरु तेरी करनी,

मैं पापी नु ला लो चरणी,

देखो ना तकफिरां मैं गुनहगार दियां,

दे दर्शन गुरु मेरे रुहां पुकार दियां |

सोना नूरी मुखड़ा दस जा,

अंखिया दे विच आके बस जा,

हस के कर जा गल्ला,प्रेम पियार दियां,

दे दर्शन गुरु मेरे रुहां पुकार दियां |

एस बगीचे दा तू है मालिक,

सब संग ताडा तू है वाली,

बूटियां कर दियो हरियां.इस गुलजार दियां,

दे दर्शन गुरु मेरे रुहां पुकार दियां |

उदारुता इब छोड़ी नाही,

लागि प्रीत नु तोड़ी नाही,

पकिया पाबो गंडा,प्रेम पियार दियां,

दे दर्शन गुरु मेरे रुहां पुकार दियां |

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।