मेरे नटवर नन्द किशोर प्यारे आ जाओ माखन चोर

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

मेरे नटवर नन्द किशोर, प्यारे आ जाओ माखन चोर |

प्यारे आ जाओ, प्यारे आ जाओ ||

मेरे मोहन चले आओ, तेरी राधा बुलाती है |

तेरे बिन मेरा जी ना लगे, तेरी याद सताती है ||

प्रभु प्रेम के अक्षर ढाई पड़े, पड़ना फिर आगे को वेद है क्या |

हसना कभी अश्रु विमोचन है, उर कंप शरीर में सेद है क्या ||

जब प्रेम परस्पर है हममे, चलो आओ मिले अब खेद है क्या |

तुम हो हम में, हम हैं तुम में, तुम में हम में फिर भेद है क्या||

तेरा दर्शन पाने को मेरे नैना तरसते हैं |

तेरी याद में यह श्यामा, दिन रात बरसते हैं |

यह विरह की अग्न्नी, मुझ रह रह जलती हैं ||

भूलने वाले से कोई कहदे जरा,

यूँ किसी को सताने से क्या फ़ायदा |

जब मेरे दिल की दुनिया बसाते नहीं,

हर घडी याद आने से क्या फायदा ||

चार तिनके जलाने से क्या फ़ायदा,

मिट सका ना मेरा वजूद |

मुझ पे बिजली गिराते तो कुछ बात थी,

आशिआना जलाने से क्या फ़ायदा |

देखते देखते तुम बदलते गए,

आते आते बड़ा इन्कलाब आ गया |

सहते सहते सितम से मैं घबरा गया,

जान ले लो रुलाने से क्या फ़ायदा |

तुने अंजामे उल्फत को देखा नहीं,

कोई होशिआरी भी काम आ ना सकी |

आँख लडती गयी, राज़ खुलते गए,

हाल-ए-दिल को छुपाने से क्या फ़ायदा |

चरणों की दासी हूँ, चरणों में ही रहना है |

जल्दी से चले आओ, श्याम तुमसे ही कहना है |

कहीं दम ना निकल जाए, मेरी नींद उड़ जाती है ||

द्वापर तो बीत गया, कलयुग भी जा रहा है |

अपनों को कोई ऐसे भला क्यूँ तड़पाता है |

कहीं रुत्त ना बदल जाए, मेरी आँख भर आती है ||

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।