हुन्न ता छेती आजा मेरी जान ते बनी ए

नरेन्द्र चंचल
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

हुन्न ता चहेती आजा मेरी जान ते बणी ए

शेर पे चडके, पवन रूप हो, अपनी झलक दिखाजा

मेरी जान ते बनी ए...

हासे खुशिया नु यह खा गई, बुरी निगाह इस जग दी

गमां दे बदल सर ते झूलदे, कहर दी नहरी वाग दी

क्यों माँ तैनू तरस ना आवे समझ न मेरे लग्दी

मेरी जान ते बनी ए...

पतझड़ दे मैं पत्या वांगु एधर ओदर डोला

चीरा तो माए अंख दे मोती मिटटी दे विच रोला

तुहियो दसदे दर्द मैं अपना कीसदे अग्गे फोला

मेरी जान ते बनी ए...

तेरे हुँदै कद तक माए बछड़े रेहन अभागे

माँ कदे वी सो नहीं सकदी जेकर बच्चडा जागे

अज्ज किधर टूट न जावण विश्वासआ दे धागे

मेरी जान ते बनी ए...

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।