जरा चल के अयोध्या जी में देखो राम सरयू नहाते मिले गे

पारंपरिक
हनुमान जी भजन राम भजन hanuman
॥ पावन पाठ ॥

जरा चल के अयोध्या जी में देखो राम सरयू नहाते मिले गे,

जन्म भूमि पे मंदिर मिला गा जिसके रखवाले बजरंग बलि है,

अंजनी लाल अपनी गधा से पापियों को मिटाते मिले गे,

जरा चल के अयोध्या जी में देखो राम सरयू नहाते मिले गे,

राम पर उठा ते है ऊँगली खुद ही उठ जायेगे इस धरा से,

राम के है जो है राम उनके शबरी सा वेर खाते मिलेंगे,

जरा चल के अयोध्या जी में देखो राम सरयू नहाते मिले गे,

वीर सुग्रीव है मित्र जिनके जिनकी सेना में नल नील अंगद ,

अपने वानो से धर्म ध्वजा को रक्शॉ से बचाते मिलेंगे,

जरा चल के अयोध्या जी में देखो राम सरयू नहाते मिले गे,

माँ कोशलेया की आँखों के तारे,

राजा दशरत को वानो से प्यारे,

भरत भइयाँ लखन शरतु घन संग भक्तो को आते जाते मिले गे,

जरा चल के अयोध्या जी में देखो राम सरयू नहाते मिले गे,

जो है राघव की प्रिये राजधानी,

राम राजा याहा सीता रानी,

दविंदर कुलदीप पर राम किरपा भक्त भक्ति लुटाते मिलेंगे ,

जरा चल के अयोध्या जी में देखो राम सरयू नहाते मिले गे,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।