सागर की गहराई में

पारंपरिक
श्री राम भजन गुरुदेव भजन ram
॥ पावन पाठ ॥

सागर की गहराई में, पर्वत की ऊंचाई में,

गुरु महिमा का अंत नहीं, ग्रंथों की सच्चाई में,

सौभाग्य रवि का उदय हुआ, गुरु राम का पाया शरणा, गुरु राम का पाया शरणा,

गुरु कृपा को पा करके ही होता भव से तरणा ,होता भव से तरना,

सूरज की अरुणाई में, सूरज की अरुणाई मे, बोलो सूरज की अरुणाई में, ग्रंथों की सच्चाई में गुरु महिमा का अंत नहीं, ग्रंथों की सच्चाई में ....

उच्च क्रिया और उच्च विचार, पाले पंचाचार - पाले पंचाचार,

जिनके नस नस होता है, समता का संचार - समता का संचार,

पंडितों की चतुराई में, पंडितों की चतुराई में, बोलो पंडितों की चतुराई में, ग्रंथों की सच्चाई में गुरु महिमा का अंत नहीं, ग्रंथों की सच्चाई में ....

महा ज्ञानी है महा तपस्वी, धीर वीर गंभीर - धीर वीर गंभीर,

जिज्ञासु की प्यास बुझाते, समाधान कर देते नीर - समाधान का देते नीर,

गणितज्ञों की इकाई में, गणितज्ञों की इकाई में, बोलो गणितज्ञों की इकाई में ग्रंथों की सच्चाई में गुरु महिमा का अंत नहीं ग्रंथों की सच्चाई में ...

हुक्म गगन का चमका सितारा, नानेश शिष्य दुलारा - नानेश शिष्य दुलारा,

राम नाम का रत्न अमोलक, बन गया नयनों का तारा - बन गया नयनों का तारा,

शब्दों की भरपाई में, शब्दों की भरपाई में, बोलो शब्दों की भरपाई में, ग्रंथों की सच्चाई में गुरु महिमा का अंत नहीं ग्रंथों की सच्चाई में ...

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।