लाज रख ले तू मुरली वालेया

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

वाह मेरे कृष्णा तेरी कुदरत, ते तेरिया बेपरवहिया

जेरहिया गल्ला मेरे चित्त न चेते, आज ओहि देखनी आया

पई वक़्त दी कैसी मैनू मार वे, पांडव जूए विच गए मैनू हार वे ।

लाज रख ले तू मुरली वालेया, घिरी गौ अज्ज शेरा विचकार वे ॥

वाला तो मैनू फड़के दुःशासन विच सभा ले आया वे,

दुर्योधन ने चीरहरण दा अज्ज है हुकम सुनाया वे ।

पंजो पांडो योद्धे बड़े बलधार वे, किवे बैठे अज्ज होके लाचार वे,

सर भीष्म पितामह ने झुका लेया, खोरे करदे की सोच विचार वे ॥

लाज रख ले तू मुरली वालेया...

राज पाठ सब हर गए पांडव, किंज हामी भर जावणगे,

जेकर तेरी मेहर न होई, इज़्ज़त वी हर जावणगे ।

खेडा खेड गया शूकनी मक्कार वे, पैगई कुंजा ताहि बाजा दी डार वे ,

रेहा गोपिया दे नाल जे तू खेड दा, मेरा लुट्या जाओ संसार वे ॥

लाज रख ले तू मुरली वालेया...

सुनियाँ अर्जां जद गिरधर ने, झटपट आन पधारे ने,

ऐसी किरपा किती पापी खिचखिच पल्ले हारे ने ।

साड़ी मुकी नईो मुक्के हंकार ने, सब वेख वेख करदे विचार ने,

आखे ‘कर्मा’ ‘सिकन्दर’ प्रेमियों, लाज द्रोपदी दी रखीं करतार ने,

लाज रख लई कृष्ण मुरार ने ॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।