मोर मुकुट तेरे नैनों में कजरा

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

मोर मुकुट तेरे नैनो में कजरा,गल बैजन्ती माल,

श्याम बड़ा प्यारा लागे,मोहन बड़ा प्यारा लागे,

बैन्या मरोड़े,मेरी मटकीय फोड़े,

मेरो माखन भी बिखरायो,कान्हा माखन भी बिखरायो,

आगे आगे दौढू,याके पीछे पीछे भागुं,

मेरे हाथ कभी आयो,कान्हा हाथ कभी ना आयाे,

ऊधम बहुत मचायो कान्हा,ब्रिज में धमाल।श्याम बड़ा प्यारा लागे.................

गेंद दई जब यमुना जल में,कूद पड़े नंदलाला, देखो कूद पड़े नंदलाला।

नाथ कालिया नाग के फन पर,आगया मुरलीवाला,

देखो आगया मुरलीवाला,

फन पे खड़ा खड़ा मुस्काए,नाचे दे दे ताल।श्याम बड़ा प्यारा लागे...........

नटवर नागर, मुरलीवाला,खड़ा खड़ा मुस्काए, कान्हा खड़ा खड़ा मुस्काए।

कभी अर्जुन के रथ को चलाए,कभी ये गाय चराए, देखो कभी ये गाय चराए।।

कभी राधा के संग विराजे,कभी गल में बईया डाल।श्याम बड़ा प्यारा लागे............

रूप तेरे को देख के कान्हा,हम तो हुए दीवाने, कान्हा हम तो हुए दीवाने।

अधर मुरलिया साजे तेरे, गायें तेरे तराने, कान्हा गायें तेरे तराने।।

गोविन्द दर्शन रज रज पाऊं, अखियों में अखियां डाल।श्याम बड़ा प्यारा लागे.............

अवधेश राणा,मथुरा

6395870827

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।