साडे सिर ते रेह्न्दी ऐ रेहमत सदा जोगिया तेरी

राजू उत्तम
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॥ पावन पाठ ॥

सानू अपने चरणी लाया तूं, साडा जग विच मान वधाया तूं,

असी जदों बुलाइये आ जावें, लावें न इक पल देरी,

साडे सिर ते रहंदी ऐ रेहमत सदा जोगिया तेरी,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।