मन उड़ गयो पंख लगा के, बन मोर पहुँच्यो बरसाने

सर्व मोहन (टीनू सिंह)
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

प्रेम भक्ति और रंगरस की सरिता बहती जाय,

ब्रजमंडल में दिव्य धाम यह बरसाना कहलाये ।

कहे ‘मधुप’ जब जब भी मोहे, याद बरसाना आय,

मन मेरा मन मोर रंगीला, उड़ता उड़ता जाय ॥

मन उड़ गयो पंख लगा के, बन मोर पहुँच्यो बरसाने ।

संकेत वन और प्रेम सरोवर,

राधा बाग और पीली पोखर ।

फिर गयो महल रंगीली में,

कलगी और पंख वो रंगवाने ॥

मन उड़ गया पंख लगा के...

सज धज कर या ने भरी उडारी,

जा पहुँचयो महल अटारी ।

श्री जी मंदिर लाड़ली लाल के,

लगा झूम झूम दर्शन पाने ॥

मन उड़ गया पंख लगा के...

सांकरी खोर और गहवर वन,

मान गड़ी में डोले तन मन ।

आकरके मोरकुटी में,

लगा पंख रंगीले लहराने ॥

मन उड़ गया पंख लगा के...

मोरकुटी में संत शरण में,

बड़ो ही आनंद गुरु चरनन में ।

सुन गीत ‘मधुप’ के रसीले,

लगो मोर नाचने और गाने ॥

मन उड़ गया पंख लगा के...

(सर्वाधिकार लेखक आधीन सुरक्षित। भजन में अदला बदली या शब्दों से छेड़-छाड़ करना सख्त वर्जित है)

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।