देखो आये गरबे की राते राते

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

माँ जगदम्बा के आये नवराते लेके आये खुशियों की इतनी सौगाते,

अपनी किरपा की माँ करदे बरसाते,

झूमे नाचे भगत देखो साथ साथ गाते,

देखो आये गरबे की राते राते देखो आये गरबे की राते,

ऊंचे ऊंचे पर्वतो से माँ चल के आई,

ज्योता वाली आंबे माँ ज्योति में समाई,

लाल लाल चुनरी माँ भक्तो ने चढ़ाई.,

गरबे में नाच रही आंबे महा माई,

माँ के कदमो से सब कदम है मिलाते,

भक्त तेरे देख माँ फुले न समाते,

गरबे वाले गीत ही सब मन को भाते,

देखो आये गरबे की राते राते देखो आये गरबे की राते,

यहाँ यहाँ आंबे ने ढाले है डेरे,

वहा वहा भगतो ने है रंग है बिखेरे,

गली गली छाई रही रंगो की लाली,

आई आज जगदम्बे शेरोवाली,

दिए तेरे मंदिर की ऐसे जगमगाते,

तारे तेरी चुनरी के ऐसे झिलमिलाते,

रूप तेरा देख कर ज्योति हर्षाति,

देखो आये गरबे की राते राते देखो आये गरबे की राते,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।