बाज रही बाज रही मोरी माई की पैजनियां भाज रही

पारंपरिक
महादेव भजन दुर्गा भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

बाज रही बाज रही मोरी माई की पैजनियां भाज रही,

ढोलक भाजे मिरदंग भाजे तबले की है तार,

भोले बाबा डमरू भजावे माँ गोरा के साथ,

बाज रही बाज रही मोरी माई की पैजनियां भाज रही,

नारद जी की वीणा भाजे भरमा देवे ताल,

अरे विष्णु देखो संख भजावे देयो तो मग्न है आज,

बाज रही बाज रही मोरी माई की पैजनियां भाज रही,

अरे हाथ खड़क तिरसूल विराजे माँ के रूप हजार,

अरे दशो दिशा में गूंजे मियां थारी जय जय कार,

बाज रही बाज रही मोरी माई की पैजनियां भाज रही,

ममता माई माँ मात भवानी सुनियो मेरी पुकार,

अरे अभिषेक तोरे चरण पड़े करियो भव से पार,

बाज रही बाज रही मोरी माई की पैजनियां भाज रही,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।