काली काली रे मोरी माता

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

काली काली रे मोरी माता कालका,

माता कालका माता कालका ,

कलकाते की काली मैया,

काली मैया काली मैया,

जग में जाहिर नाम माई रे,

काली काली रे मोरी माता कालका,

मइहर में बैठी माता शरधा माता शरधा ,

देती सुर और ज्ञान माई रे,

काली काली रे मोरी माता कालका,

देवर में बैठी त्रिपुर सुंदरी,

तीनो रूप दिखाए माई रे,

काली काली रे मोरी माता कालका,

काली मटकी मैया काली,

सोभा मठ की बढ़ाये माई रे,

काली काली रे मोरी माता कालका,

पांच भगत मैया यश तोरे गाये,

दयो आशीष मनाये माई रे,

काली काली रे मोरी माता कालका,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।