शेरावाली पहाड़ा वाली मेहरवाली माता

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

शेरावाली पहाड़ा वाली मेहरवाली माता,

मन की ईशा पूरी करती जो भी द्वारे आता,

शेरावाली पहाड़ा वाली मेहरवाली माता,

इनकी भगति से जीवन की बादाए टल जाए,

सुख का सूरज निकले और दुःख का सूरज ढल जाए,

चौकठ पे है जो भी आता कभी निराश ना जाता,

शेरावाली पहाड़ा वाली मेहरवाली माता

सूरत इनकी जितनी प्यारी महिमा उतनी न्यारी ,

इनकी रचना चाँद सितारे धरती दुनिया सारी,

राजा हो या रंक यहाँ पर हर कोई शीश झुकाता,

शेरावाली पहाड़ा वाली मेहरवाली माता

अपने भगतो की पीड़ा इनसे न देखि जाए,

रक्शा करती है माँ जब जब संकट आये,

चरणों के जो दर्शन पा ले धन्य जीवन हो जाता,

शेरावाली पहाड़ा वाली मेहरवाली माता

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।