माँ अपने दिल से भुला तो ना दोगी

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

माँ अपने दिल से भुला तो ना दोगी

हँसते हुए को माँ रुला तो ना दोगी

माँ पाने दिल से ............

नौ महीने गर्भ में रखकर हमको जन्म माँ देती है

खुद सोती है गीले में सूखे में हमको रखती है

माँ पाने दिल से .............

बेटा बेटा कहके पहले माँ कहना सिखलाती है

पकड़ के मेरी उंगली फिर चलना मुझे सिखाती है

माँ पाने दिल से ............

पढ़ा लिखा कर मुझको माँ बी ए पास कराती है

माँ को भूल ना पाऊं मैं ऐसा मुझे सिखाती है

माँ पाने दिल से ............

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।