तुझे क्यों समझ न आए

मोहम्मद रफ़ी
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॥ पावन पाठ ॥

दुःख सुख दोनों तन के कपडे किस कारन पहनाए

किस कारन पहनाए

तुझे क्यों समझ न आए, तुझे क्यों समझ न आए

वो चाहे तो प्यासा मारे, चाहे तो प्यास बुझाए

तुझे क्यों समझ न आए, तुझे क्यों समझ न आए

तेरे मन की खातिर पगले तन का बिछा बिछौना

जब तक चाबी भरी प्रभु ने तब तक चले खिलौना

ऐसा नाचे मॉस की पुतली, जैसा नाच नचाए

तुझे क्यों समझ न आए, तुझे क्यों समझ न आए

जल बिन मछली जी नहीं सकती, माँ बिन जिए ना बच्चा

इन्दर उसका पानी भरता जिसका सिदक है सच्चा

वो चाहे तो गागर में भी सागर को छलकाए

तुझे क्यों समझ न आए, तुझे क्यों समझ न आए

बेसमझो को समझ नहीं कब आये कैसी घड़िया

जेठ महीने में लग सकती है सावन की झड़िया

कौन समय आकाश और धरती अपना ब्याह रचए

तुझे क्यों समझ न आए, तुझे क्यों समझ न आए

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।