नाचत दै दै कर ताली राघव राम लला

पारंपरिक
श्री राम भजन राम भजन ram
॥ पावन पाठ ॥

नाचत दै दै कर ताली राघव रामलला,

हर्षित मन मह महतारी राघव रामलला,

पग में घुंघरू कमर करधनिया,

कर में कंगन मनोहर बतियां,

बेसर की लटकन न्यारी

दुई दुई दशन अधर बिच झलकैं,

लोचन कमल के ऊपर पलकैं,

ज्यों भ्रमर करत रखवारी

भाइन के संग ता ता थैया,

नाचत राघव गावत मैया,

किलकत निज प्रतिबिंब निहारी

नारद मुदित बजावत वीणा,

कागभुसुंडि का गान प्रवीणा,

उमा संग झूमैं त्रिपुरारी

प्रभु सुखधाम "वैष्णव" जन के,

लखि छवि विधि सों मनावत मिलिके,

चिर जीवै अजिर बिहारी

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।