और क्या क्या तुझसे मांगो मेरी माँ

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

और क्या क्या तुझसे मांगो मेरी माँ,

बिन मांगे ही माँ तूने सब दे दियां,

वैष्णो देवी माँ तेरी ऐसी किरपा,

जिस ने श्रद्धा से तुझको दाया मेरी माँ,

ध्यान तेरे चरणों में लगाया मेरी माँ,

उसकी बिगड़ी को पल में तूने बनाया माँ,

हम पर डाल अपनी किरपा की नजर,

कर दे हम दुखियो का भाला,

और क्या क्या तुझसे मांगो मेरी माँ,

इक पल भी जो तेरी नजर हट जाए,

तो जीवन हमारा पल में मिट जाए,

हो जाए तेरी महिमा किस्मत ही पलट जाए,

सुन ले पहाड़ा वाली मेरी वैष्णो देवी माँ,

खाली झोली को तूने पल में भरा,

और क्या क्या तुझसे मांगो मेरी माँ,

इक छोटा सा वर दे मुझे ओ मेरी माँ,

यहाँ तेरे रेहम से सभी सुख मिले मेरी माँ,

टूट जाए न कही मेरे मन की आस्था,

तू ही रखले लाज अब मेरी वैष्णो माँ,

वैष्णो देवी माँ तेरी ऐसी किरपा,

बिन मांगे ही माँ तूने सब दे दियां

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।