लो आ गई वैष्णो माँ आज जगराते में

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

लो आ गई वैष्णो माँ आज जगराते में,

मेरी शेरोवाली माँ आज जगराते में,

फुला दी सहज सजाओ माँ न कॉल बिठाओ,

हथा ते मेहँदी ला के लाल चूड़ा पहनाओ,

लंगर वीर भी नचदा भैरो नाथ भी सजदा,

कर लो दर्शन माँ दा माँ दा शेर है ग़ज्दा,

होनी महरा वाली छा आज जगराते में,

लो आ गई वैष्णो माँ आज जगराते में,

चुनियाँ चुनियाँ लाल रंग दिन चुनियाँ,

माँ उडीकन तनु अखा हो गैयन सुनियाँ,

श्रद्धा दे नाल मियां तेरी ज्योत जगाई,

खुशियां दिया आज घड़ियां घर साढ़े तू आई,

बड़ी किस्मत वाली था आज जगराते में,

लो आ गई वैष्णो माँ आज जगराते में,

शक्ति दी माँ शक्ति पापिया नु भी तारे,

कंजका दे नाल खेड़े सुम्भ निशुंभ नु मारे,

लकी राजा लग चरनी वैष्णो दुःख हरनी,

रेहमता जग वंड दी आजा माँ दी शरनी

दुःख कट दी मेरी माँ आज जगराते में,

लो आ गई वैष्णो माँ आज जगराते में,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।