मैं जोगन शेरावाली की

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

जो कुछ भी दिया है मुझे मैया ने दिया है,

क्या क्या बताऊ उस ने क्या एहसान किया है,

उस ने लाज रखी हर सवाली की,

मैं जोगन शेरावाली की मैं जोगन शेरावाली की,

हस्ता है तू हसले जमाना मैं गरीब हु,

मैं खुश नसीब हु की मैं उनके करीब हु ,

मैं जोगन शेरावाली की मैं जोगन शेरावाली की,

मैं आज उन्हें चरणों को चुम रही हु,

है शेरावाली सवाल मैं झूम रही हु,

मैं जोगन शेरावाली की मैं जोगन शेरावाली की,

उस डूबने वाले को वो देती है किनारा,

जिसने भी सच्चे दिल से है तुझको पुकारा,

कुछ इस तरह से साया तेरा साथ है मेरे,

देखे मुझे तो कहता है मुझे संसार ये सारा,

मैं जोगन शेरावाली की मैं जोगन शेरावाली की,

तू ही तो मेरी शाम है तू ही सेहर है ,

कदमो में देख तेरे मोहताज का सिर है

मुझको नहीं है फ़िक्र जमाने की जरा भी,

जब शेरावाली साथ है किस बात का दर है,

मैं जोगन शेरावाली की मैं जोगन शेरावाली की,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।