नगाड़ा नगाड़ा नगाड़ा भजा

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

फिर लहराई माँ की चुनरियाँ आये है नवराते,

घर घर ज्योत चली मैया की गली गली जगराते,

झूमो नाचो ऐसे भैया आ जाए मजा,

नगाड़ा नगाड़ा नगाड़ा भजा,

भाजे ढोल मंजीरे है देखो भाजे है खड़ताल,

नाच नाच आज सभी का बुरा हुआ है हाल,

आज ख़ुशी का मौका आया बंदे न लजा,

नगाड़ा नगाड़ा नगाड़ा भजा,

सिंह चढ़ कर के आई भवानी नैना बरसे प्यार,

कोई नारियल भेट चढ़ावे कोई गले का हार,

श्रद्धा से चरणों में माँ के सिर को तू जुका,

नगाड़ा नगाड़ा नगाड़ा भजा,

कर सोलह शृंगार भवानी ओढे लाल चुनरियाँ,

सोहनी सोहनी लागे मैया लागे ना ही नजरियां,

मैया प्यारी प्यारी लागे किस ने दिया सजा,

नगाड़ा नगाड़ा नगाड़ा भजा,

होली और दिवाली भगतो दोनों आज मनाओ,

श्याम कहे शेरावाली का सब को लाड लड़ाओ,

जो कोई सामने आये उसको जम के तू नचा

नगाड़ा नगाड़ा नगाड़ा भजा,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।