मां भक्तो के अंगना आई

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

अंबे मैया सजी सिंह चाड़ के चली,

आज भक्तो के अंगना आई,

संग लाँगुर और भैरव को लाई,

सोलह श्रृंगार किया अंबे मा भवानी ने,

लाल चुनरिया ओडी महारानी ने,

नाक नथनिया कानों में बाली,

और होटो पे लाली लगाई,

संग लंगूर........

शीश मुकुट गले रत्नों की माला,

लाल लाल चोला सतरंगी गोटे वाला,

माथे की बिंदिया भी चम चम चमके,

और हाथों में मेहंदी रचाई,

संग लान्गुर और.....

आज मैया भक्तो के भाग जगाएगी,

बारी बारी मैया घर भक्तो के जाएगी,

" ईश्वर" ने मैया जी के चरणों में आकर.

और मैया की रहमत पाई,

संग लानगुर और............

जय माता की

लेखक गायक। ईश्वर वर्मा

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Jaimata की

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।