पालम का छोरा

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॥ पावन पाठ ॥

सारे गाम में दादा तेरा रुका हो रहया से,

यो पालम का छोरा दादा तेरा हो रहया से,

घोड़ा तेरा सफेद सवारी प्यारी लगे से,

तेरी सूरत देख के दादा संकट भागे से,

तेरा सेवक सदा सुखी न धोखा हो रहया से,

यो पालम का छोरा दादा तेरा हो रहया से………….

तेरा जन्मदिन मने दशहरा मेला टाडा भरता,

तेरे दर पे जो आवे तू हाथ शीश पे धरता,

12 गाम झुके धुने पे मौका हो रहया से ,

यो पालम का छोरा दादा तेरा हो रहया से………….

चदर चढे पतासे चढ़ते भेली कोई चढ़ावे,

देसी घी की ज्योत सब तेरा गुण गावे,

जम के नाचो कीर्तन में न टोटा हो रहया से,

यो पालम का छोरा दादा तेरा हो रहया से………….

नही जगह की कमी कई किले में मंदिर तेरा

कहे भूलन मेरे घर में भी मारो दादा फेरा ,

कहे हरीश पालम का छोरा तेरा हो रहया से,

यो पालम का छोरा दादा तेरा हो रहया से…………

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।