बांके बिहारी की अंखिया जादू कर गई

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

बांके बिहारी की अंखिया जादू कर गई

बिसर गई सुध रही न तन की ......हाय रे.....

मै तो मर गई मर गई मर गई मर गई

मेरे नन्द लाला की अंखिया जादू कर गई

इन अंखियो ने मुझ को लुटा

दुनिया का हर बंधन टुटा

इन्हें देख के मै तो लोगो

अब तो नाचने लग गई लग गई लग गई लग गई

बांके बिहारी.........

बांकी चितवन बांकी झांकी

दीवानी मै बांकी अदा की

ऐसा रूप मुझे दिखलाया

दीवानी मै बन गई बन गई बन गई बन गई

बांके बिहारी.........

बांके बिहारी की अंखिया जादू कर गई

बिसर गई सुध रही न तन की ......हाय रे.....

मै तो मर गई मर गई मर गई मर गई

बांके बिहारी...........

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।