खेर माई रे मोरी खेर माई

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

खेर माई रे मोरी खेर माई,

कहा लगा गई देर माई,

अरे सुन ले मोरी भी टेर माई,

कहा लगा गई देर माई,

लेनी बुआ तेरी भेट चढ़ा दऊ,

खेर माई मैं तुम खे मना लू,

सुबह से हो गई अंधेर माई,

कहा लगा गई देर माई,

लाल ध्वजा लाल चुनरी चढ़ा दू,

जा सोनां के हार पहना दैउ,

नारियल के लागे है ढेर माई,

कहा लगा गई देर माई,

अरे लटक मटक चली आओ भवानी,

लट बिखराये मारत किलकारी,

चौसठ जोगणियां संग खेल माई,

कहा लगा गई देर माई,

जब्ल पुर की बड़ी खेल माई,

कहा बिलम गई काहे मैं आई,

नील से नजरे न फेर माई,

कहा लगा गई देर माई,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।