भगतो का बेडा पार किया पार किया है

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

भगतो का बेडा पार किया पार किया है,

ममता लुटाने वाली ने,

भगतो का बेडा पार किया पार किया है,

सीढिया जो भी चढ़ के आता है,

अपना दुखड़ा उसे सुनाता है,

सब की सुनती है शरदे मैया,

दुःख हरती है शारदे मियां,

चौखठ पे भुलाने वाली ने,

भगतो का बेडा पार किया पार किया है,

गीत हम भी उसी के गाते है,

नाम का हम उसीके खाते है,

सारे दुनिया में नाम है जिसका झोलियाँ भरना काम है जिसका,

बिगड़ी बनाने वाली ने,

भगतो का बेडा पार किया पार किया है,

लाखो निर्धन हुए है धन वाले ,

कितने अंधे हुए नैयन वाले,

दर से संतान पा गए कितने,

रोगो से मुक्ति पा गए कितने,

उजड़े घर वसाने वाली ने,

भगतो का बेडा पार किया पार किया है,

अपने मंदिर की चाकरी देदे,

शालनी को भी नौकरी दे दे,

काम सारे अजीब बनते है,

सब के बिगड़े नसीब बनते है,

ऊंचे सिंघासन वाली ने,

भगतो का बेडा पार किया पार किया है,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।