पलके ही पलके बिछायेगे जिस दिन साई बाबा घर आएंगे

पारंपरिक
माँ गंगा भजन साईं भजन ganga
॥ पावन पाठ ॥

पलके ही पलके बिछायेगे जिस दिन साई बाबा घर आएंगे ,

हम तो है साई के जन्मो से दीवाने रे,

मीठे मीठे भजन सुनाएंगे,

जिस दिन साई बाबा घर आएंगे,

पलके ही पलके बिछायेगे जिस दिन साई बाबा घर आएंगे ,

घर का कोना कोना मैंने फूलो से सजाया,

बंधन वार बंधाई घी का दीपक जलाया,

प्रेमी जनो को भुलायेंगे

जिस दिन साई बाबा घर आएंगे,

पलके ही पलके बिछायेगे जिस दिन साई बाबा घर आएंगे ,

गंगा जल की जारी सी प्रभु चरण धुलाऊ,

दीप जलाऊ भोग लगाउ आरती उतारू,

खुशबु ही खुस्भु महकाये गे,

जिस दिन साई बाबा घर आएंगे,

पलके ही पलके बिछायेगे जिस दिन साई बाबा घर आएंगे ,

अब तो लग्न एक ही साई प्रेम सुधा बरसा दे,

जन्म जन्म की मैली चादर अपने रंग रंगवा दे ,

जीवन को जीवन बनायेगे,

जिस दिन साई बाबा घर आएंगे,

पलके ही पलके बिछायेगे जिस दिन साई बाबा घर आएंगे ,

साई नाम बड़ा सुखदाई भजले प्रेम से सरे,

नंदू प्रेमी नाच नाच कर साई को रिजा ले,

नैनो से नैना मिलायेगे,

जिस दिन साई बाबा घर आएंगे,

पलके ही पलके बिछायेगे जिस दिन साई बाबा घर आएंगे ,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।