माँ बाप का दिल दुखा तो न दोगे

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॥ पावन पाठ ॥

माँ बाप का दिल दुखा तो न दोगे,

भुढ़ापे में उनको रुला तो न दोगे,

माँ बाप का दिल दुखा तो न दोगे,

नो महीने रखा था तुझे गरब में माँ ने,

फिर जन्म दिया तुझजो पाला तेरी माँ ने,

सही जितने कष्टों को भुला तो न दोगे,

माँ बाप का दिल दुख तो न दोगे,

जिस पिता की ऊँगली को थामा सा बचपन में,

मगरूर हुआ इतना भरपूर जवानी में,

भूड़ापे में उनको धगा तो न दोगे,

माँ बाप का दिल दुख तो न दोगे,

माँ के बाप के फर्ज को तो हम सब को निभाना है,

भगवान् से बढ़ कर भी ऋषि मुनियो ने माना है,

नगर इनको सत्ता तो न दोगे,

माँ बाप का दिल दुख तो न दोगे,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।