आ जाओ अग्रोहा धाम ये खुशियों का नगर है

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॥ पावन पाठ ॥

आ जाओ अग्रोहा धाम ये खुशियों का नगर है

भगवन का घर है यहाँ किस बात का डर है

बैठा है महाराज दरबार लगाके

अपनी नज़र से देख लो एक बार तो आके

अग्रसेन के दरबार में बच्चों की कदर है

भगवन का घर है यहाँ किस बात का डर है

कहने की ज़रूरत नहीं आना ही बहुत है

चरणों में इनके सर को झुकना ही बहुत है

तेरी हर एक बात की दाता को खबर है

भगवन का घर है यहाँ किस बात का डर है

जिसने भी दिल से इनको अपना बना लिया

उसको भला है क्या कमी सब कुछ ही पा लिया

है साथ अग्रसेन जाता वो जिधर है

भगवन का घर है यहाँ किस बात का डर है

महाराजा अग्रसेन की आँखों में आँखे डाल

दिइवाना बन जायेगा तू ऐसा है ये कमाल

बिन्नू यहीं तो इनकी नज़रों का असर है

भगवन का घर है यहाँ किस बात का डर है

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।