नंद भवन में उड़ रही धूल धूल मोहे प्यारी लगे

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

नंद भवन में उड़ रही धूल

धूल मोहे प्यारी लगे

उड़े उड़े धूल मेरे नैनन पे आवे

मैने दर्शन करे भरपूर

धूल मोहे प्यारी लगे

नंदभवन में उड़ रही धूल

धूल मोहे प्यारी लगे........

उड़ उड़ धूल मेरे होठों पे आवे

मैं भजन गाए भरपूर

धूल मोहे प्यारी लगे

नंदभवन में उड़ रही धूल

धूल मोहे प्यारी लगे.........

उड़ उड़ धूल मेरे हातन पे आवे

मैने ताली बजाई भरपूर

धूल मोहे प्यारी लगे

नंदभवन में उड़ रही धूल

धूल मोहे प्यारी लगे..........

तीन लोक तीरथ नही

जैसी ब्रज की धूल

लिपटी देखी अंग सो तो

भाग जाए यमदूत

मुक्ति कहे गोपाल से

मुझे मेरी मुक्ति बाताओ

ब्रज रज माथे पर लगे

तो मुक्ति भी मुक्त हो जाए

उड़ी उड़ी धूल मेरे पैरन पे आवे

मैने परिक्रमा लगाई

भरपूर धूल मोहे प्यारी लगे

नंदभवन में उड़ रही धूल

धूल मोहे प्यारी लगे...........

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।