कान्हा का मैं हुआ दीवाना जग की दौलत भाये न

मीरा बाई
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

कान्हा का मैं हुआ दीवाना जग की दौलत भाये न,

भगति का रंग चढ़ा है सिर पे पूजा करनी आये न,

कान्हा का मैं हुआ दीवाना जग की दौलत भाये न,

मथुरा वृद्धावन में ढूंढा कही मुझे तू भाता न,

मोहन मोहन रट ता फिरू मैं फिर भी कन्हैया आता न,

कहा छुपा है जाके गिरधर ,मुझको दर्श दिखाए न,

कान्हा का मैं हुआ दीवाना जग की दौलत भाये न,

तेरे नाम पे मीरा बाई पी गई थी विष का प्याला,

ऐसी किरपा करि सँवारे अमृत उसे बना डाला,

मुझपर भी कर नजर मेहर की राह मुझे कोई पाए न,

कान्हा का मैं हुआ दीवाना जग की दौलत भाये न,

लगी लगन मने बालक पण से ध्यान तेरा मने लगा लिया,

आठो पहर सुमिर सनवारियाँ मन में मंदिर बना लिया,

केशव गोविन्द की जिंदगियां कही बीत ऐसे जाए न,

कान्हा का मैं हुआ दीवाना जग की दौलत भाये न,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।