सतरंगी माई सतरंगी

पारंपरिक
महादेव भजन दुर्गा भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

सतरंगी माई सतरंगी मोरी माँ की चुनरियाँ सतरंगी

लै चुनरी कान्हा जी आवे,

रुक्मणि जी के रूप सजावे,

लै चुनरी भोले जी आवे,

पारवती जी के रूप सजावे,

सतरंगी माई सतरंगी मोरी माँ की चुनरियाँ सतरंगी

लै चुनरी भरमा जी आवे,

सरसवती जी के रूप सजावे,

लै चुनरी विष्णु जी आवे,

लक्ष्मी जी के रूप सजावे,

सतरंगी माई सतरंगी मोरी माँ की चुनरियाँ सतरंगी

लै चुनरी अल्ला जी आवे,

रानी मछला के रूप सजावे,

लै चुनरी इन्दर जी आवे,

रेखा लेखा रानी के रूप सजावे ,

सतरंगी माई सतरंगी मोरी माँ की चुनरियाँ सतरंगी

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।